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गोंडा में जीएसटी स्ट्राइक: कागजों पर खिलौनों का खेल, डकारे 18 करोड़!

सावधान! गोंडा में फर्जी फर्मों का मायाजाल, ₹18 करोड़ के आईटीसी घोटाले में एफआईआर।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। गोंडा: करोड़ों का जीएसटी घोटाला उजागर, फर्जी फर्मों के जरिए ₹18 करोड़ की टैक्स चोरी।।

सोमवार 26 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

गोंडा।। जनपद में फर्जी फर्मों के जरिए सरकार को करोड़ों की चपत लगाने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। राज्य कर विभाग (GST) की जांच में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की आड़ में 18 करोड़ रुपये के बड़े टैक्स घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले में कोतवाली नगर में तीन मुख्य फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

💫कागजों में चलता रहा करोड़ों का कारोबार

जांच में यह बात सामने आई है कि इन फर्मों ने बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति किए, केवल कागजों पर ही करोड़ों का व्यापार दिखाया। इस “कागजी खेल” का मुख्य उद्देश्य सरकार से अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्राप्त करना था। विभागीय अधिकारियों ने लंबे समय तक रेकी करने के बाद इस जालसाजी की परतें खोलीं।

💫मुख्य आरोपी फर्में और घोटाले का स्वरूप

जांच टीम ने जिन तीन फर्मों को मुख्य रूप से घेरे में लिया है, उनका विवरण इस प्रकार है:

👉M/S मां जी एंटरप्राइजेज: बलविंदर लाल नामक व्यक्ति द्वारा संचालित इस फर्म ने ₹12.28 करोड़ का भारी-भरकम टर्नओवर दिखाया और इसके जरिए ₹2.18 करोड़ की अवैध ITC पास कराई।

👉M/S वर्शि मूर्ति एंटरप्राइजेज: संतोष राम की इस फर्म ने चार अन्य सहयोगी कंपनियों को ₹8.69 करोड़ की फर्जी ITC का अनुचित लाभ पहुँचाया।

👉M/S SL TRADERS: खिलौनों के व्यापार के नाम पर पंजीकृत ओम लाल की इस फर्म ने व्यापार की आड़ में ₹8.15 करोड़ की सबसे बड़ी कर चोरी को अंजाम दिया।

💫जांच में खुले चौंकाने वाले राज

जब राज्य कर अधिकारियों ने इन फर्मों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया, तो हकीकत देखकर दंग रह गए:

👉लापता मालिक: पंजीकरण के समय दिए गए पतों पर इन फर्मों के मालिकों का कोई सुराग नहीं मिला।

👉फर्जी दस्तावेज: फर्म के पंजीकरण में दर्ज मोबाइल नंबर और पते पूरी तरह से फर्जी पाए गए।

👉अस्तित्वहीन कार्यालय: जिन स्थानों पर करोड़ों का व्यापार होना दिखाया गया था, वहां जमीन पर कोई गतिविधि नहीं थी।

💫पुलिस की कार्रवाई

राज्य कर विभाग की तहरीर पर कोतवाली नगर पुलिस ने तीनों फर्मों और उनके संचालकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जिनसे यह पता चल सके कि इस रैकेट के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है और क्या विभाग के कुछ अन्य लोगों की भी इसमें संलिप्तता है।

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